राजस्थान के रेगिस्तान का ये इलाका साल की शुरुआत से बरस के आखिरी दिन तक लोकगीतों में बसे दर्द को लेकर जीता है। भारत - पाकिस्तान सीमा पर बसे बाड़मेर-जैसलमेर की कहानी हर बार पानी के दर्द से शुरू होकर पानी के दर्द पर आकर खत्म हो जाती है. बहुत सी बातें शुरू हुई लेकिन कोई भी साकार नही हो पाई .यहा की बेबसी और बदहाली सुर्खिया तो बनी लेकिन आहत आहत ही रहा. राहत किसी मुट्ठी में छिपी ही रही ।
रात भर से उदास है पानी.
नूर ही नूर उनके जलवे में,
उनके चेहरे को रास है पानी.
सारी दुनिया है रेत का दरिया,
और दरिया की आस है पानी.
ज़िन्दगी का भरोसा क्या कहिये,
जिंदगी का क़यास है पानी.
खेत भी अपने और आवा भी,
कभी खुशियां तो यास है पानी.